कुंडली दोष निवारण मंत्र व उपाय
कुंडली दोष निवारण मंत्र व उपाय
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परिचय
कुंडली दोष से अभिप्राय जन्म कुंडली में ग्रहों का अशुभ स्थानों व प्रभावों में होना है। जब भी कोई ग्रह राहु, केतु, शनि और मंगल जैसे पाप ग्रहों के प्रभाव में होता है तो हमारी कुंडली में दोष का निर्माण होता है। ग्रहों के खराब या त्रिक भाव में होने से भी कुंडली दोष बनता है। हालाँकि, कुंडली दोष, ग्रह के केंद्र या त्रिकोण भाव में होने पर भी बन सकता है। उदाहरण के लिए चतुर्थ भाव में स्थित मंगल यानि केंद्र भाव व्यक्ति की कुंडली में मांगलिक दोष बनाता है। कुंडली दोष अनेक प्रकार का हो सकता है इस पृथ्वी पर कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसकी कुंडली किसी भी प्रकार के दोष से सर्वथा मुक्त हो। इसलिए, जन्म कुंडली दोष से डरने जैसी कोई बात नहीं है और जो बात महत्वपूर्ण है वह यह है की आपकी कुंडली में किस तीव्रता से कुंडली दोष का निर्माण हुआ है।

कैसे बनते हैं कुंडली में दोष?
कुंडली में दोष बनने का कारण ग्रहों की नकारात्मक स्थिति होती है। जब कोई ग्रह नीच भाव में हो या फिर आपके लग्न, राशि को पाप ग्रह सीधे देख रहे हों तो इस प्रकार की स्थितियां कुंडली में दोष उत्पन्न करती हैं। मान्यतानुसार यह दोष इस जन्म के साथ-साथ पूर्व जन्म से भी जुड़े हो सकते हैं। जब जातक की कुंडली में कोई दोष उत्पन्न हो रहा हो तो उक्त अवस्था में संबंधित ग्रह के शुभ फल मिलने की बजाय वह ग्रह नेगेटिव परिणाम देने लगता है।
प्रमुख कुंडली दोष:
कालसर्प दोष
जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच होते हैं, तो कालसर्प दोष बनता है. इस दोष से व्यक्ति अपनी प्रतिभा का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाता और उसे हमेशा दुविधा में रहना पड़ता है
पितृ दोष
जब कुंडली के लग्न भाव और पांचवें भाव में सूर्य, मंगल, और शनि होते हैं, तो पितृ दोष बनता है. इसके अलावा, जब कुंडली के आठवें भाव में गुरु और राहु एक साथ होते हैं, तो भी पितृ दोष बनता है
गुरु चांडाल दोष
जब कुंडली में राहु बृहस्पति एक साथ हों तो गुरु चांडाल दोष बन जाता है। इस दोष के कारण व्यक्ति को अपने जीवन में अत्यंत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
केन्द्राधिपति दोष
स्थिति - जब भी किसी शुभ ग्रह की राशि केंद्र में होती है तो उसको केन्द्राधिपति दोष लग जाता है। इस दोष के कारण करियर, शिक्षा में सफलता हाथ नहीं लगती। साथ ही व्यवसाय संबंधित दिक्कतें हो सकती हैं।
मंगल दोष
जब कुंडली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में मंगल होता है, तब मांगलिक दोष लगता है। मंगल ग्रह की ऐसी स्थिति वैवाहिक जीवन के लिए अच्छी नहीं मानी जाती।
भकूट दोष
कुंडली मिलान में भकूट दोष तीन तरह से लगता है. अगर भकूट दोष 6-8 का आता है, तो विवाह के बाद शारीरिक कष्ट हो सकता है. अगर भकूट दोष 9-5 का आता है, तो संतान प्राप्ति में देरी होती है. अगर भकूट दोष 12-2 का आता है, तो वित्तीय समस्या हो सकती है.
घातक दोष
जब कुंडली में शनि व मंगल की युति होती है। यह दोष व्यक्ति के जीवन में दुर्घटनाओं की संभावनाओं को बढ़ावा देता है। मंगल शनि की राशि मकर में ही उच्च होता है
विष दोष
शनि और चंद्रमा की युति कुंडली में विष दोष बनाती है। इस दोष के कारण व्यक्ति हमेशा बेचैन रहता है और बिना वजह चिंता करता रहता है। व्यक्ति निराशावादी बन जाता है

कुंडली दोष के लक्षण:
- जीवन में बार-बार असफल होना
- जीवन में अनादर और अपमान
- संबंधों का स्थायी नुकसान वित्तीय अस्थिरता
- करियर में समस्या
- मानसिक अस्थिरता और लगातार तनाव
- स्वास्थ्य और धन की हानि
- शादी में समस्या
- संतान प्राप्ति में समस्या
- जीवन में प्यार और सम्मान की कमी
- परिवार के किसी सदस्य या दोस्तों का समर्थन न होना
- जीवन मे अकेलापन
eBook से आप क्या सीखेंगे?
संतान पर कुंडली दोष का प्रभाव
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
यह eBook किसके लिए है?
यह ईबुक उन सभी के लिए है जो कुंडली दोष से पीड़ित है और कुंडली दोष से छुटकारा पाना चाहते है।
eBookका वितरण कैसे होगा?
eBook सीधे आपके ईमेल पर भेजी जाएगी।
क्या भुगतान केवल एक बार ही करना होगा?
जी हा भुगतान एक ही बार करना होगा, आप आजीवन eBook का उपयोग कर पाएंगे।
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जी हां आप डाउनलोड भी कर सकते है।



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